| هذه أثوابهم والحلل |
|
| ليت شعري أين قومي نزلوا |
|
| نزلوا بالشعب من كاظمة |
|
| هي قلبي والحشى والمقل |
|
| فانمحت من ذكرهم آثارنا |
|
| وبدا ذاك الغرام الأول |
|
| بربا نجد وقد ذاب الربا |
|
| وانمحى نجد إذا ما أقبلوا |
|
| هي الشمس من خلف الجدار تطلعت |
|
| إذا سدّ خرق منه أظهرها خرق |
|
| طرقت بها ما خصني من شئونها |
|
| كما كان من تلك الشئون له طرق |
|
| على سره منه الرضى وهو سرّنا |
|
| فمنا علينا ذاك ما غنت الورق |