| وإنّي لألهو بالمُدامِ، وإنّها |
|
| لمَورِدُ حَزمٍ إن فعَلْتُ ومَصدَرُ |
|
| ويُطرِبُني في مجلسِ الأنسِ بَينَنا |
|
| أنابيبُ في أجوافِها الريحُ تصفِرُ |
|
| ودهمٍ بأيدي الغانياتِ تقعقعتْ |
|
| مفاصلُها من هولِ ما تتنظرُ |
|
| وصفرِ جفونٍ ما بكتْ بمدامعٍ، |
|
| ولكنّها روحٌ تذوبُ وتقطرُ |
|
| وأشمَطَ مَحنِّي الضّلوعِ على لظًى |
|
| بهِ الضّرُّ إلاّ أنّهُ يتَسَتّرُ |
|
| إذا انجابَ جنحُ الليلِ ظلتْ ضلوعُه |
|
| مجرَّدَة ً تَضحَى لديكَ وتُعصِرُ |